शांत मन का अर्जुन: प्रो. (डॉ.) सिद्धार्थ राजू बताते हैं कि असली लड़ाई बाहर नहीं, अंदर होती
अर्जुन एक सफर पर था। गाँव से कस्बा। कस्बे से शहर। शहर से पुणे। और पुणे की धरती पर एक ऐसा आसमान था जो पहले कभी इतना बड़ा नहीं लगा था। लेकिन फैलहा: हार से जन्मी जीत की ज़िद का असली चरमोत्कर्ष कोई शहर नहीं है। कोई उपाधि नहीं है। कोई पद नहीं है। इस पुस्तक […]





