जब दो दुकानें एक ही बाज़ार में खुलीं और पाँच साल में एक आगे निकल गई
एक ही बाज़ार में दो इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें खुलीं। पहली दुकान रोज़ खुलती है, ग्राहक आते हैं, बिक्री होती है। मालिक से पूछा जाए कि आगे क्या योजना है तो जवाब मिलता है। “दुकान चल रही है, बस यही काफी है।” दूसरी दुकान भी उसी तरह शुरू होती है। फर्क सिर्फ सोच में है। वहाँ
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