Aastha aur Vigyaan ka Sangam (Hindi)

आस्था और विज्ञान का संगम पाठकों को उन रोज़मर्रा की परंपराओं और अनुष्ठानों को नए दृष्टिकोण से देखने के लिए आमंत्रित करती है, जिन्हें हम अक्सर बिना प्रश्न किए निभाते चले आते हैं। उगते सूर्य को जल अर्पित करना, संध्या के समय दीपक जलाना, घर में तुलसी का पौधा रखना, किसी नए कार्य से पहले नारियल तोड़ना, तथा भोजन, विवाह और त्योहारों से जुड़े संस्कार यह पुस्तक इन सभी के पीछे छिपे एक सरल प्रश्न पर ठहरती है: क्यों

अंधविश्वास कहकर इन परंपराओं को नकारने के बजाय, यह पुस्तक उनके पीछे मौजूद तर्क और व्यवहारिक समझ को उजागर करती है। कई रीतियाँ स्वास्थ्य, पर्यावरण, मनोविज्ञान और सामाजिक संतुलन से गहराई से जुड़ी हुई हैं। जो हमें प्रतीकात्मक लगता है, उसमें अक्सर पीढ़ियों से संचित जीवन-ज्ञान, अनुशासन और मानसिक स्पष्टता छिपी होती है।

इस पुस्तक में आप जानेंगे:

  • दैनिक अनुष्ठानों जैसे सूर्य को अर्घ्य और संध्या दीपक का स्वास्थ्य व जीवन-लय से संबंध
  • भारतीय घरों में तुलसी जैसे पौधों की वैज्ञानिक और पर्यावरणीय भूमिका
  • हाथों से भोजन करना और पालथी मारकर बैठने जैसी आदतों के पीछे का तर्क
  • विवाह, त्योहारों और उपचार से जुड़े संस्कारों में छिपी व्यावहारिक सोच
  • कैसे परंपराएँ अनुशासन, सजगता और भावनात्मक संतुलन को विकसित करती हैं

सरल, स्पष्ट और विचारशील भाषा में लिखी गई यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो जिज्ञासु हैं, सोचने-समझने की इच्छा रखते हैं और सम्मान के साथ प्रश्न उठाना चाहते हैं। यह पुस्तक यह याद दिलाती है कि परंपरा आधुनिकता की विरोधी नहीं है, बल्कि ज्ञान का वह रूप है जो अनुष्ठानों के माध्यम से हमारे जीवन में आज भी उपस्थित है।

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