पाँच मिनट की बातचीत जो चार सौ रुपये ज़्यादा दिलाती है

एक औरत अकेली आई। मिक्सर देखने।

काम करने वाले ने दो मॉडल रखे, दाम बताया, और बैठकर फोन उठा लिया।

उसने पूछा। “इसमें चटनी वाला जार अलग से आएगा?”

जवाब मिला। “हाँ, बाहर मिलता है।”

कोई बारीकी नहीं। कोई दिलचस्पी नहीं। उसकी तरफ दोबारा देखा तक नहीं।

वो उठकर सामने वाली दुकान गई।

वहाँ किसी ने पूछा। “मैडम, रसोई में कौन-कौन से काम होते हैं? डोसा बनाती हैं? शेक?”

बात पाँच मिनट चली। उसे समझ आया कि सात सौ पचास वॉट उसके काम का नहीं, एक हज़ार वॉट ज़रूरी है। स्टील का जार प्लास्टिक से कहीं बेहतर रहेगा लंबे इस्तेमाल में। उसने चार सौ रुपये ज़्यादा दिए। पर खुश होकर गई।

अंतर सामान में नहीं था। अंतर उस पाँच मिनट की बातचीत में था जहाँ उसे लगा कि कोई उसकी ज़रूरत को गंभीरता से ले रहा है।

वो एहसास जो कोई छूट नहीं दिला सकती:

नसरुद्दीन नरसीदानी अपनी किताब बड़ा रिटेल विथ छोटा विटेल में यह बात बहुत साफ कहते हैं।

ग्राहक सिर्फ सामान नहीं खरीदता। एक एहसास खरीदता है। उसे लगना चाहिए कि उसका यहाँ आना मायने रखता है। उसे महसूस होना चाहिए कि वो सिर्फ एक और बिल नहीं है। वो एक इंसान है जिसकी ज़रूरत यहाँ सुनी जा रही है।

जहाँ यह एहसास मिलता है वो दाम में पाँच सौ ऊपर होकर भी भरी रहती है। जहाँ नहीं मिलता वो सस्ती होकर भी सूनी।

पाँच मिनट में क्या होता है जो घंटे भर में नहीं होता:

पहली दुकान में गलत क्या हुआ? माल वही था। दाम भी मिलता-जुलता। गलत यह हुआ कि उस ग्राहक को महसूस हुआ कि मैं यहाँ ज़रूरी नहीं हूँ।

और इस एहसास का कोई तोड़ किसी पेशकश के पास नहीं।

आप बीस प्रतिशत छूट दे दो। फिर भी वो वहीं जाएगी जहाँ उसकी बात सुनी गई।

यह पाँच मिनट की बातचीत दरअसल वो सबसे कीमती चीज़ है जो कोई दुकानदार अपने ग्राहक को दे सकता है। और इसमें कोई पैसा नहीं लगता। बस ध्यान लगता है। सुनने का धीरज लगता है। और सही बात कहने की समझ लगती है।

एक बार आज़माइए:

किताब में एक प्रयोग बताया गया है। एक हफ्ते तक यह करिए। हर ग्राहक की बात कम से कम तीन मिनट बिना रोके सुनिए।

उस हफ्ते बिक्री में जो फर्क आएगा वो हैरान करने वाला होगा। क्योंकि जब ग्राहक को लगता है कि उसकी बात सुनी जा रही है तो वो खुद-ब-खुद ज़्यादा खुलकर बताता है कि उसे क्या चाहिए। और फिर सही चीज़ सुझाना आसान हो जाता है।

बड़ा रिटेल विथ छोटा विटेल नसरुद्दीन नरसीदानी द्वारा अमेज़न, फ्लिपकार्ट, किंडल और गूगल बुक्स पर उपलब्ध है। अभी खरीदें और वो पाँच मिनट की बातचीत सीखें जो बिक्री और भरोसा दोनों एक साथ बनाती है।

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