स्क्रीन जानकारी देती है, ज़िम्मेदारी आप देते हैं

“भैया, यही चीज़ इंटरनेट पर बारह सौ रुपये कम दिख रही है।”

यह लाइन अब हर दूसरे ग्राहक के मुँह से निकलती है।और इस लाइन पर जो जवाब आता है वो तय करता है कि ग्राहक रुकेगा या फिसलेगा।
और इस लाइन पर जो जवाब आता है वो तय करता है कि ग्राहक रुकेगा या फिसलेगा।
नसरुद्दीन नरसीदानी ने अपनी किताब बड़ा रिटेल विथ छोटा विटेल में इस एक पल को बड़े करीने से खोला है। और दो रास्ते दिखाए हैं।

पहला रास्ता जो खुद की कीमत गिरा देता है:

“ठीक है सर, बताइए कहाँ मिल रहा है, हम भी कम कर देते हैं।” ग्राहक ने लिया। सौदा हो गया। पर अगली बार फिर फोन की तस्वीर लेकर आएगा। और हर बार यही खेल। क्योंकि आपने उसे सिर्फ एक ही बात सिखाई कि मेरे पास दाम के सिवा कोई वजह नहीं। जिस दिन कोई और दो सौ रुपये नीचे गया, वो आपकी दुकान का रास्ता भूल जाएगा। आपने खुद अपनी कीमत गिरा दी।

दूसरा रास्ता जो एक सौदे में दो ग्राहक लाता है:

“सर, दाम का फर्क दिख रहा है, मैं समझता हूँ। पर ज़रा यह सोचिए। लगाई कौन करेगा? कल कोई दिक्कत आई तो फोन कहाँ जाएगा? गारंटी के कागज़ात किसके ज़िम्मे होंगे? इंटरनेट पर जो दिख रहा है वो चीज़ है। यहाँ जो मिलेगा वो चीज़ के साथ ज़िम्मेदारी भी है।”

ग्राहक रुका। सोचा। बारह सौ रुपये ज़्यादा दिए। पर जाते वक्त उसने वो बात कही जो किसी छूट से नहीं मिलती।

“भैया, मेरे भाई को भी एसी लेना है, मैं आपका नंबर भेज दूँगा।”

एक सौदे में दो ग्राहक आए। बिना एक रुपया खर्च किए।

जो चीज़ इंटरनेट पर नहीं मिलती:

नसरुद्दीन नरसीदानी यह बात किताब में बार-बार कहते हैं। आज का ग्राहक जानकार होकर आता है। पर जानकारी और समझ में फर्क है। जानकारी इंटरनेट देता है। समझ तजुर्बे से आती है।

जब आप उस ग्राहक को अपने तजुर्बे से कुछ ऐसा बताते हैं जो उसने कहीं नहीं पढ़ा, कुछ ऐसा जो उसकी खास ज़रूरत के लिए सही है, तो उसके लिए आप सिर्फ एक दुकानदार नहीं रहते। आप उसके भरोसे के इंसान बन जाते हैं।

और सलाहकार को कोई नहीं छोड़ता।

दाम की होड़ में जीतने वाला भी घायल निकलता है:

यह किताब की सबसे महत्वपूर्ण बात है जो हर दुकानदार को याद रखनी चाहिए।
दाम की होड़ ऐसी लड़ाई है जिसमें जीतने वाला भी घायल निकलता है। जो इसमें उतरा वो हर बार मुनाफा कटवाता रहेगा। और एक दिन इतना कट चुका होगा कि खड़े रहने का कोई मतलब नहीं बचेगा।
असली मुकाबला दाम का नहीं, भरोसे का है।


बड़ा रिटेल विथ छोटा विटेल नसरुद्दीन नरसीदानी द्वारा अमेज़न, फ्लिपकार्ट, किंडल और गूगल बुक्स पर उपलब्ध है। अभी खरीदें और दाम की होड़ से बाहर निकलकर भरोसे की ज़मीन पर खड़े होना सीखें।

Grab your copy now: https://amzn.in/d/0iADMIid

Share the Post:

Join Our Newsletter