मार्च का महीना।
बिक्री तीन महीने से ठंडी। किस्त, तनख्वाह, बिजली, सब जमा। एक रात लगा। बंद करके कहीं नौकरी ढूँढ लूँ। क्या फायदा रोज़ शटर उठाने का जब जेब में कुछ बचता ही नहीं।
सुबह बच्चे ने पूछा। “पापा, आज दुकान चलोगे? मुझे वो नया स्पीकर दिखाना है दोस्तों को।”
उसकी आँखों की चमक ने वो याद दिला दिया जो हिसाब-किताब ने दबा दिया था।
यह दुकान सिर्फ रोज़ी नहीं है।
पैसा वजह नहीं हो सकता:
नसरुद्दीन नरसीदानी ने यह बात अपनी किताब बड़ा रिटेल विथ छोटा विटेल में जिस तरह से लिखी है वो सीधे दिल में उतरती है।
पैसा ज़रूरी है। पर पैसा वजह नहीं बन सकता। पैसा नतीजा है, ईंधन है। वजह कुछ गहरी होनी चाहिए। कोई ऐसी जड़ जो सूखे मौसम में भी हिलने न दे।
जिसके पास सिर्फ कमाई की वजह है वो पहले मुश्किल मोड़ पर बिखर जाता है। जिसकी वजह गहरी है वो तकलीफ झेलकर भी अगली सुबह शटर उठाता है। क्योंकि उसे पता है कि यह सफर सिर्फ आज के बिल से बड़ा है।
जब तूफान आए तो लंगर काम आता है:
उद्देश्य उस लंगर की तरह है जो तूफान में भी थामे रखता है।
किताब में ऐसे कई व्यापारियों का जिक्र है जिनके पास सब कुछ था। बड़ी जगह, अच्छा सामान, पैसा भी। लेकिन एक गहरी वजह नहीं थी। और जब पहला तूफान आया तो वो बिखर गए।
दूसरी तरफ ऐसे लोग भी देखे जिनके पास कुछ नहीं था सिवाय एक पक्के इरादे के। और वो हर मुश्किल से पार निकल गए।
रिटेल में मौसम आते हैं:
यह बात हर दुकानदार जानता है। पर जानते हुए भी जब मौसम बुरा होता है तो भीतर से टूटने लगते हैं।
उद्देश्य की गहराई ही तय करती है कि मुश्किल वक्त में आप कितनी देर टिक सकते हैं। जब वजह गहरी है, कुछ ऐसी जो पैसे से परे है, तो मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, आदमी खड़ा रहता है।
बच्चे की आँखों की वो चमक। वो सिर्फ एक पल नहीं था। वो उस पूरी वजह की याद दिलावट थी जिसके लिए यह दुकान खड़ी की थी।
और वही याद सबसे बड़ी शक्ति बन गई।
बड़ा रिटेल विथ छोटा विटेल नसरुद्दीन नरसीदानी द्वारा अमेज़न, फ्लिपकार्ट, किंडल और गूगल बुक्स पर उपलब्ध है। अभी खरीदें और अपनी उस गहरी वजह को पहचानें जो मुश्किल मौसम में भी शटर उठाने की हिम्मत देती है।
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