Himalay Ka Santulan Aastha: Vikas Aur Samadhan, Prakriti Ki Suraksha Aur Sthayi Vikas Ki Disha Mein Sanyukt Prayas

यह  पुस्तक एक संवेदनशील यात्रा है उस भूमि की, जहाँ आस्था, प्रकृति और जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। यह पुस्तक हिमाचल की बदलती जलवायु, पर्यावरणीय संकटों और विकास के नए समीकरणों को सरल भाषा में समझाती है।

इसमें लेखक ने आँकड़ों, शोध और लोगों की सच्ची कहानियों को जोड़कर यह दिखाया है कि समस्या कितनी गहरी है पर समाधान भी उतने ही पास हैं। हर अध्याय एक अनुभव है कहीं नदियों की पुकार, कहीं पहाड़ों का धैर्य, तो कहीं जनता के सामूहिक प्रयासों का चित्र।

पुस्तक का उद्देश्य डर या निराशा नहीं, बल्कि जागरूकता और उम्मीद जगाना है। यह पाठक को सोचने पर मजबूर करती है क्या हम अपनी धरती के साथ उतना ही जुड़ाव महसूस करते हैं जितना उसने हमें दिया है?

यह कृति विज्ञान, नीति और संस्कृति के संगम से निकला वह संदेश है कि “प्रकृति हमारी साथी है, शत्रु नहीं।”

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